स्वास्तिक किसका प्रतीक माना जाता है? Know all about Swastik Symbol
Published on: January 3, 2023

स्वास्तिक क्या होता है?

स्वास्तिक  को समृद्धि और सौभाग्य का रूप माना जाता है | स्वास्तिक  शब्द को संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ कल्याण के लिए अनुकूल होता है | स्वास्तिक  भारत में हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला शुभ प्रतीक है | 

स्वास्तिक को साथिया या सातिया भी कहा जाता है| हमारे वैदिक ऋषियों ने कुछ विशेष प्रतीकों की रचना की स्वास्तिक इन्ही में से एक है | स्वास्तिक मंगल को दर्शाता है और हमारे जीवन में खुशियां लाता है | आज हर धर्म और संस्कृति में इसका उपयोग अलग अलग रूप से किया जाता है | 

Symbol of Swastik_ Hindu Sanskriti

स्वास्तिक किसका प्रतीक माना जाता है ?

हमारे वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वास्तिक में चार दिशाएँ होती है पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण इसलिए हर हिन्दू जब कोई शुभ कार्य करता है तो इसकी पूजा करता है | ये पंक्तियाँ ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद के प्रतीक है ऐसा हमारी हिन्दू मान्यताओं का मानना है और ऐसा भी मानना है कि ये भगवान् ब्रह्मा के चार सिरों को दर्शाती है जो ब्रह्माण्ड के रचयिता है | 

लाल रंग का स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है। इसे बनाने के लिए केसर, सिंदूर, रोली और कुमकुम का प्रयोग होता है।

Swastik Symbol Importance_ Hindu Sanskriti

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स्वास्तिक कहाँ बनाया जाता है ?

प्रचीन काल से भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में स्वास्तिक को मंगल प्रतीक माना जा रहा है। हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अपने घर के दरवाजे और घर के अंदर पूजा स्थान पर इस चिन्ह को बनाते हैं। वह केवल इस चिन्ह को बनाते ही नहीं बल्कि इसकी पूजा भी करते हैं। हिंदू धर्म में बहुत सारे चिन्ह हैं जिन्हें शुभ माना गया है। उनमें से यह भी एक है। स्वास्तिक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे जिस दिशा में भी बना दिया जाए यह वहां की सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ा देता है। यदि कहा जाए कि यह सबसे से विशेष और शक्तिशाली चिन्ह है तो यह गलत नहीं होगा। 

स्वास्तिक बनाने की विधि क्या है?

हिंदू धर्म के प्रसिद्ध ऋगवेद में स्वास्तिक को सूर्य का प्रतीक माना गया है | स्वास्तिक बनाते समय जो सीधी रेखा खींची जाती है उन्हें काटना नहीं चाहिए क्योकि बीच का स्थान ब्रह्म का होता है | स्वास्तिक की चार रेखाएं अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष का प्रतीक है | स्वास्तिक के अंदर चार बिंदु समर्पण, प्रेम, विशवास, और श्रद्धा को दर्शाते है | स्वास्तिक को शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है |

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स्वास्तिक कहाँ बनाया जाता है_ Hindu Sanskriti

हिंदुओं के लिए स्वास्तिक का महत्व

  1. हिंदू धर्म में किसी भी बड़े या छोटे पूजा अनुष्ठान से पहले स्वास्तिक बनाना बहुत शुभ माना जाता है। 

2. भारत में किसी भी पूजा अनुष्ठान की शुरुआत में, शादी हो या गृह प्रवेश स्वास्तिक चिन्ह बनाया जाता है और इसे सौभाग्य लाने वाला माना जाता है।

3. हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि स्वास्तिक घर के वास्तु को ठीक कर सकता है। स्वास्तिक में व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर निकालने की शक्ति होती है।

4. हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण 4 सिद्धांतों को धर्म, अर्थ काम और मोक्ष का प्रतीक भी माना जाता है। इसे चार वेदों का प्रतीक – ऋग्, यजु, साम और अथर्व। इसे चार मार्ग ज्ञान, कर्म, योग और भक्ति के भी प्रतीक जाता हैं।

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